अक्षरशः सत्य...
Wednesday, January 12, 2011
जन्नत तक जाने का जिसने सपना था दिखलाया ,
दुनिया में अव्वल आने कि तड़पन जिसने था भर पाया ,
उस कर्मठ को,उस निश्छल को, दुनिया ने आज नकार दिया !
क्या ये उसकी गलती थी जो उसने स्वदेश से प्यार किया !
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