Saturday, March 19, 2011

पीपल की ठंडी छाँव सा माँ का आँचल ढूंढता हूँ, 
बहना के हाथों से राखी का बंधन ढूंढता हूँ,
उस समय की आंधी में खोया हुआ वो रिश्ता ढूंढता हूँ,
उन बीते हुए लम्हों में अपना बचपन ढूंढता हूँ!

उन गलियों, उन चौबारों में यारों को ढूंढता हूँ, 
वो निश्छल, वो निःस्वार्थ भाव का अंकुर ढूंढता हूँ,
उन बिना बात के बातों का कारण अब ढूंढता हूँ,
उन बीते हुए लम्हों में अपना बचपन ढूंढता हूँ!

उन नए पगों की लचक, और वो ज़ज्बा ढूंढता हूँ, 
वो धुंधली पड़ी यादों का कोई कारण ढूंढता हूँ,
जो बिना बोले हर बात समझे वो साथी ढूंढता हूँ,
उन बीते हुए लम्हों में अपना बचपन ढूंढता हूँ!

ये समय चक्र गतिवान है मैं ये जानता हूँ, 
जो बीत गई सो बात गई मैं ये भी मानता हूँ,
फिर उस वक़्त की असफल ख़ोज से मैं अब ये सोचता हूँ,
जाने क्यूँ अब मैं हर पल अपना बचपन ढूंढता हूँ!!    

Wednesday, March 16, 2011

रुख्सार से ये चिलमन हटाती क्यूँ नहीं,
ख़ुदा का दिया हुस्न आखिर दिखाती क्यूँ नहीं,
हम करते हैं इज़हारे-ए-मोहब्बत बस तुम्हीं से,
सच्चे आशिकों को आखिर पहचानती क्यूँ नहीं!! 



Saturday, March 12, 2011

नज़्म लिखता हूँ जुदाई में तुम्हारी,
कशीदे पढ़ता हूँ खुदाई में तुम्हारी!
ये तो मशगूल रहने की फितरत है हमारी,
क्यूँकि तन्हाइयों में याद आती है तुम्हारी!


Saturday, March 05, 2011

आफताबी, आफत-ऐ-जान या आफरीन हो तुम,
बन रक़ीब मैं पल-पल ये ही सोचूं की क्या हो तुम, 
मोहब्बत के अनकहे अलफ़ाज़ की दास्ताँ हो तुम,
मेरी नज़रों से देखो तो मेरे दोनों ज़हां हो तुम!