बसंत की हवा हर साल मुझसे कहती है,
क्यूँ तुम्हारे दिल पे राख की परत रहती है,
उस हवा को कैसे बताऊँ, किसकी है ये भूल,
क्यूँ नही खिलते मेरी बगिया में मोहब्बत के फूल.
Monday, August 24, 2009
जज्बातों की आँधियों में उड़ता रहा, फिरता रहा,
तमन्नाओं की सिफारिश, उस दिल से मैं करता रहा,
उस दिल को, इस दिल की चाहत पे ऐतेबार न था,
वो दिल था या पत्थर था, या उसकी धड़कनों में साज़ न था.
तमन्नाओं की सिफारिश, उस दिल से मैं करता रहा,
उस दिल को, इस दिल की चाहत पे ऐतेबार न था,
वो दिल था या पत्थर था, या उसकी धड़कनों में साज़ न था.
वक्त के थपेड़े में अरमान सारे बह गए,
इश्क की कब्र पे हम आंशु बहाते रह गए,
नज़रों की कहनी नज़रों पे ही खत्म हुई,
और उस कहानी के हम बस पात्र बनके रह गए.
इश्क की कब्र पे हम आंशु बहाते रह गए,
नज़रों की कहनी नज़रों पे ही खत्म हुई,
और उस कहानी के हम बस पात्र बनके रह गए.
चेहरे के पीछे जो गम हम छुपाते हैं,
कैसे कहें की हमें वो कितना याद आतें हैं,
उधर वो तो मशगूल हैं अपनी मोहब्बत में,
इधर हम हैं जो घुट-घुट के जिए जातें हैं.
कैसे कहें की हमें वो कितना याद आतें हैं,
उधर वो तो मशगूल हैं अपनी मोहब्बत में,
इधर हम हैं जो घुट-घुट के जिए जातें हैं.
राहें जितनी कठिन हों,रुकेगा नही ये राहगीर,
हौसला हो दिल में तो खिंचती पत्थर पर लकीर |
चाहे जैसी भी खींची हो, तूने किस्मत की लकीर
लडूंगा इतना कि तू ही बदलेगा मेरी तक़दीर |
Thursday, August 20, 2009
हाथों में किस्मत की लकीरें नही हैं,
चाहत है दिल में, जुबां पे नही है,
अरमान हैं जो दिल में, उनको दिखलाऊं कैसे?
किस्मत की लकीरें आखिर लाऊँ कैसे?
Wednesday, August 19, 2009
कठिन है डगर, पर मुझको तो चलना है.
दूर है मजिल, पर मुझे न थामना है,
गिरने से तो कभी हौसला न टूटना है,
मुझे तो गिरकर फ़िर उठना है, फ़िर उठना है...
दूर है मजिल, पर मुझे न थामना है,
गिरने से तो कभी हौसला न टूटना है,
मुझे तो गिरकर फ़िर उठना है, फ़िर उठना है...
रास्तों के काटें हमें चलना सीखातें हैं|
राहों के फूल हमें आराम पहुँचातें हैं|
फूल मिले उन्हें जो किस्मत के धनी है|
काटों पर चले वो,जो कर्मठ है, ज्ञानी है|
राहों के फूल हमें आराम पहुँचातें हैं|
फूल मिले उन्हें जो किस्मत के धनी है|
काटों पर चले वो,जो कर्मठ है, ज्ञानी है|
Subscribe to:
Comments (Atom)