Thursday, August 20, 2009

हाथों में किस्मत की लकीरें नही हैं,

चाहत है दिल में, जुबां पे नही है,

अरमान हैं जो दिल में, उनको दिखलाऊं कैसे?

किस्मत की लकीरें आखिर लाऊँ कैसे?

1 comment:

  1. बहुत खूब. जारी रहें.
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    उल्टा तीर पर पूरे अगस्त भर आज़ादी का जश्न "एक चिट्ठी देश के नाम लिखकर" मनाइए- बस इस अगस्त तक. आपकी चिट्ठी २९ अगस्त ०९ तक हमें आपकी तस्वीर व संक्षिप्त परिचय के साथ भेज दीजिये. [उल्टा तीर] please visit: ultateer.blogspot.com/

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