अक्षरशः सत्य...
Monday, August 24, 2009
जज्बातों की आँधियों में उड़ता रहा, फिरता रहा,
तमन्नाओं की सिफारिश, उस दिल से मैं करता रहा,
उस दिल को, इस दिल की चाहत पे ऐतेबार न था,
वो दिल था या पत्थर था, या उसकी धड़कनों में साज़ न था.
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