अक्षरशः सत्य...
Saturday, November 10, 2012
ख़ुदा से ख़ैर माँगा तो मुझे रुसवाई उसने दी ...
पलट कर चाह मांगी तो मुझे तन्हाई उसने दी ...
दुआ के वास्ते सजदे में मैंने सर झुकाया तो ...
अहम् का बोध देकर फिर मुझे ख़ुदाई उसने दी!!
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